साक्षी मलिक भारतीय महिला पहलवान साक्षी मलिक के इतिहास रचने के पीछे उनके पिता सुखवीर सिंह उनकी मां का बड़ा योगदान मानते हैं और बताते हैं कि उन्होंने कुश्ती लड़ने की प्रेरणा अपने दादा से ली, जो अपने समय में पहलवान थे. रियो में भारत को पहला पदक के तौर पर कांस्य दिलाने वाली साक्षी के पिता दिल्ली में बस कंडक्टर हैं और उन्होंने कुश्ती कभी नहीं लड़ी.
देसूरी ( पाली जिला ) : मन में सेवा का भाव रखने वाले लोग किसी मोके का इंतजार नहीं करते है उसी तरह देसूरी निवासी नियाज़ मोहम्मद गौवंश की सेवा के लिए आगे आये है। नियाज़ मोहम्मद एक व्यवसायी है और देसूरी इंटरप्राइजेज प्रतिष्ठान के मालिक है। इन्होने पचास हजार के लागत का चारा स्थानीय बायोसा मंदिर की गोशाला को भेट किया है। विगत के गौशाला में १२५ के लगभग गोवंश है और उनकी देख रेख के लिए प्रबंध भी है। गोडवाड़ की आवाज की तरफ से नेक दिल नियाज़ मोहम्मद को हार्दिक शुभमनाये।

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