सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कलियुग का हुनमान ...

कलियुग का हुनमान ।
मेरठ में हुई एक युवक की मौत का गम बांटने पहुँचे बंदर की उपस्थिति वहाँ सभी को हैरान कर गयी। मृतक के साथ उस बंदर ने ऐसा व्यवहार किया कि मानों वह मृतक का बहुत करीबी रहा हो। बंदर के हाव- भाव, प्रतिक्रिया और हरकतें बिल्कुल इंसानों जैसी थी।
एनएएस कालेज में वरिष्ठ लिपिक सुरेंद्र सिंह 86/3 शास्त्री नगर में रहते हैं।
सुरेंद्र सिंह का बड़ा बेटा सुनील तोमर (31) तीस हजारी कोर्ट दिल्ली में वकील था। कैंसर की बीमारी से सुनील की शुक्रवार रात दिल्ली में मृत्यु हो गई।
परिजन शनिवार सुबह करीब साढ़े चार बजे उसका शव लेकर घर पहुंचे। घर पहुंचने के बाद जब परिजन और आसपास के लोग गमगीन माहौल में अंतिम यात्रा की तैयारी में जुटे थे। तभी करीब पांच बजे एक बंदर भीड़ के बीच से होकर शव के पास जा बैठा।
बंदर ने पहले सुनील के पैरों को छुआ और फिर उसके सिर के पास जाकर बैठ गया। जब शव को स्नान कराया गया तो इस बंदर ने भी एक व्यक्ति के हाथ से लोटा लेकर पानी शव के ऊपर डाला।
---शवयात्रा में भी हुआ शामिल...

शवयात्रा में शामिल होते हुए बंदर सूरजकुंड स्थित शमशान घाट तक जा पहुंचा।
उसने चिता पर लकड़ी तक रखने का प्रयास किया। बंदर ने कफन में ढके शव का चेहरा उघाड़ कर अंतिम दर्शन करते हुए एक बार फिर उसके पैर छुए, अंतिम क्रिया में परिजनों की मदद की।
अंतिम संस्कार के बाद जब गमगीन लोग हैंड-पंप पर हाथ पांव धोकर पानी पी रहे थे, वहीं क्रिया बंदर ने भी की। अंतिम क्रिया के बाद अन्य लोगों के साथ बंदर फिर सुरेंद्र सिंह के घर वापस आ गया।



---मां और पत्नी से लिपटकर रोया...

घर पहुंच कर बंदर ने अपने हाथों से गमगीन लोगों को पानी पीने के लिए गिलास दिए। उसके बाद रोती हुई सुनील की मां प्रेमवती की गोद में बैठकर और
सुनील की पत्नी पूनम को गले लगकर सांत्वना दी। लोगों के घर से जाते ही बंदर भी चला गया। लोगों के अनुसार उन्होंने इस बंदर को पहले कभी भी मोहल्ले में नहीं देखा था।







---हनुमान भक्त था सुनील...
सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सुनील हनुमान भक्त था। मेहंदीपुर स्थित बालाजी के दरबार में वह अक्सर जाता था। बालाजी की बहुत ही श्रद्धा और नियम से
पूजा किया करता था। सुरेंद्र सिंह के अनुसार यह बन्दर पहले कभी यहाँ नहीं आया ।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बोझ नहीं वरदान है बेटियां, पिता को किया लीवर डोनेट

मिर्ज़ापुर - बेटियां माता पिता के लिए बोझ नहीं  वरदान है ये साबित किया है मिर्ज़ापूरा में रहने वाली वीणा ने । वीणा  ने अपने पिता को लीवर डोनेट कर उनकी जान बचाइ। वीणा के पिता रवि प्रकाश त्रिपाठी हालत दिनोदिन बिगड़ती चली जा रही थी।  डॉक्टर्स ने उनकी बीमारी का इलाज  लिए लीवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी।  रवि प्रकाश ने परिवार के सदस्यों से बात की कोई भी लीवर  डोनेट करने आगे नहीं आया , यहाँ तक के उनका बेटा भी नहीं। बेटे सहित परिवार के कई लोगो की लीवर देने इनकार जैसे ही वीणा को पता लगा उसने बिना कुछ सोचे  अपने ससुराल वालो  लीवर डोनेट करने की अनुमति ली।  मौत मुँह पर खड़े अपने पिता को बचाने के लिए अपनी दो छोटी बेटियों की चिंता छोड मुस्कुराते हुए ऑपरेशन थिएटर में चली गयी। 25 वर्षीया वीणा खुद दो बेटियों की माँ है   वीणा का साहसी कदम सफल रहा डॉक्टर का ऑपरेशन  सफल रहा फ़िलहाल पिता और पुत्री हॉस्पिटल में है। आज वीणा की हर जगह चर्चा हो रही है, किस प्रकार एक बेटी ने अपने पिता के प्राणो की रक्षा की। बेटियों को गर्व है वीणा पर

जवाई बांध अपडेट : पानी की आवक धीमी , 11 में से सिर्फ 3 गेट खुले है , गेज 59

29 जुलाई 2017 : जवाईबांध ( सुमेरपुर )  जिले में भारी बारिश के बाद कल शाम तक जवाईबांध के 13 में से 11 गेट खोले गए थे।  1963 के बाद पहले बार 10 वा  गेट खोला गया। 54 बाद जवाईबांध में इतनी पानी की आवक हुयी है।  बांध से निकलने वाली जवाई नदी जालोर जिले के कई गावो को प्रभावित करती है।  कल रात भर प्रशासन लोगो को अलर्ट करता रहा।  निचले इलाको के गावों को खाली करवाया गया।  मध्य रात्रि में पानी की आवक धीमी पड़ने के बाद 7 गेट बंद किये गए , जिससे जालोर जिले वासियों को थोड़ी सी राहत मिली। ताजा जानकारी के अनुसार अभी 11 मेसे 3 गेट खुले है। #जवाईबांध #jawaiBandh #rajasthanRain 

राजस्थान का एक ऐसा गाँव जहाँ नहीं है एक भी चाय और शराब की दूकान, अगर कोई बेचते मिलता है तो लगता है जुर्माना

500 घरों की बस्ती वाला मायापुर गांव, यहां चाय की दुकान खोलने पर जुर्माने का प्रावधान है। राजस्थान का एक ऐसा गाँव जहाँ नहीं है एक भी चाय और शराब की दूकान __ अगर कोई बेचते मिलता है तो लगता है जुर्माना __ पढ़े पूरी खबर _ . राजस्थान के अजमेर से 18 किमी दूर पीसांगन पंचायत समिति का मायापुर गांव। 500 घरों की बस्ती में करीब 5 हजार लोगों की आबादी है। गांव के 400 सालों के इतिहास में अब तक यहां चाय की एक भी दुकान नहीं खुली। बुजुर्ग ग्रामीणों का तर्क है कि चाय की दुकान पर युवा गपशप लगाकर अपना कीमती समय व्यर्थ गंवाते हैं, इससे बेरोजगारी भी बढ़ती है। साथ ही चाय से शरीर में तरह -तरह के नुकसान भी होते हैं। - गांव में चाय बेचने पर 501 रुपए जुर्माने का प्रावधान है। किसी गांव में चाय की दुकान नहीं होने वाला संभवत: यह राज्य का ही नहीं, बल्कि देश का एकमात्र गांव है। - इसके साथ ही इस गांव में शराब के ठेके भी नहीं हैं। यहां तक कि बाहर से शराब पीकर आने वालों से 5001 रुपए जुर्माना वसूला जाता है। - मायापुर गांव रतना बाणोत ने बसाया था। बताते हैं कि इनके छह पुत्र थे आैर गांव में छह ही गुवाडिया थ...